महाशय दर्जी की दुकान पर चढ़े और बोले

महाशय दर्जी की दुकान पर चढ़े और बोले

गुस्से में लाल—’पीले होते वे महाशय दर्जी की दुकान पर चढ़े और बोले

—’देख रहे हो यह सूट? तुम कहते थे, कपड़ा कम है।

मटका गली वाले दर्जी ने उसी कपड़े से खुद भी बनाया

और जो कपड़ा बचा, उससे अपने पांच साल के लड़के

का एक कोट भी बना लिया।

मैं तुमसे पूछता हूं…..’

‘मैं खुद ही बताये देता हूं।’ दर्जी विनम्रता से बोला,

‘असल में मेरा लड़का ग्यारह साल का है।’